10th Geography Short Question Chapter 3

10th Geography Short Question Chapter 3

प्रश्न 1. जल संसाधन के क्या उपयोग हैं? लिखें।

उत्तर-जल संसाधन का उपयोग पेयजल, घरेलू कार्य, सिंचाई, उद्योग, जन स्वास्थ्य, स्वच्छ जल, जलविद्युत निर्माण, मत्स्य पालन, जलकृषि, पर्यटन विकास, जल-क्रीड़ा, परमाणु संयत्र, शीतलन, औद्योगिक क्षेत्रों में इसका उपयोग होता है

प्रश्न 2. भारत के किन भागों में नदी डेल्टा का विकास हुआ है? [2018A]

उत्तर–भारत के पूर्वी तटीय मैदान स्थित महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा निर्मित डेल्टा का निर्माण हुआ है। यहाँ की मृदा में पोटाश, फॉस्फोरस और चूना जैसे तत्वों की प्रधानता है। अधिक उपजाऊ होने के कारण गहन कृषि
की जाती है।

प्रश्न 3: नदी-घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें। अथवा, नदी घाटी परियोजना के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ? [2015C]

उत्तर–नदी घाटी परियोजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
(i) सिंचाई और भूमि का वैज्ञानिक उपयोग एवं प्रबन्ध।
(ii) जल विद्युत शक्ति उत्पादन में वृद्धि और औद्योगिकरण।

(3) बाढ़ नियंत्रण और बीमारियों की रोकथाम में सहायता।
(iv) मछली फार्मिंग का विकास एवं कृत्रिम झीलों में आमोद-प्रमोद के साधन
उपलब्ध कराना।
(v) भूमि कटाव रोककर उसे कृषि योग्य बनाना आदि।

प्रश्न 4. जल संकट क्या है?

उत्तर-उद्देश्य जनित जल की अनुपलब्धता जल संकट कहलाता है । सूखा जल संकट का ही कारण है। वर्षा में वार्षिक और मौसमी परिवर्तन के कारण जल संसाधन की उपलब्धता के समय और स्थान की विभिन्नता से है। प्रायः जल की कमी इसके अतिशोषण, अतिउपयोग एवं समाज के विविध वर्गों में जल की असमान वितरण से उत्पन्न होती है। किसान खेतों पर अपने निजी कुँए और नलकूप के द्वारा भूमि को संचित कर कृषि उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। इससे भूमिगत जल-स्तर नीचे गिर रहा है और जल संकट उत्पन्न हो रहा है।

प्रश्न 5. वर्षा जल संग्रहण/वर्षा की खेती से आप क्या समझते हैं ? इसके उद्देश्यों को लिखें।

उत्तर-जल संग्रहण/वर्षा की खेती का तात्पर्य आर्द्र खेती से है, जो विशेषकर कांप और काली मिट्टी के क्षेत्रों में की जाती है। यहाँ 100 से 200 सेमी वर्षा होती है। मध्यवर्ती गंगा का मैदान इसका प्रमुख क्षेत्र है जहाँ प्राय: दो फसलें पैदा की जाती है और कभी-कभी जायद की फसल भी उत्पन्न कर ली जाती है। ऐसे क्षेत्र में उन्नत सिंचाई तंत्र का भी शुष्क मौसम में प्रयोग कर लिया जाता है।

प्रश्न 6. अंतर्राज्यीय जल-विवाद के क्या कारण हैं ?

उत्तर–अंतर्राज्यीय जल-विवाद का मुख्य कारण एक नदी का कई राज्यों से होकर बहना एवं जल बँटवारे को लेकर एक राज्य से दूसरे राज्य में हमेशा टकराहट होती है जैसे-कर्नाटक, केरल, तमिलनाडू के बीच कावेरी जल-विवाद, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आंध्रप्रदेश के बीच तुंगभद्रा जल विवाद ।

प्रश्न 7. भारत की नदियों के प्रदूषण के कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर–वर्तमान समय में भारत की अधिकांश नदियाँ प्रदूषित है एवं छोटी नदियाँ तो अत्यंत विषैली हो गई हैं। कारण देश की अधिकांश बडी नदियों के तट पर स्थित बड़े-नगरों तथा तटों के पास औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा कारखानों से विस्तृत जल के प्रवाह के कारण अधिकांश नदियाँ प्रदूषित हो गयी हैं। इसके अलावे घरेलू एवं रसायनों, कीटनाशकों, कारखानों के कचरे, रंगों एवं जीव जंतु, पेड़-पौधे, मृत शरीर के अवशेष भी नदियों के जल को प्रदूषित कर रहे हैं।

 

प्रश्न 8. हिमालय के तीन मुख्य नदी क्षेत्रों के नाम बताइए?

उत्तर-(i) सिंधु नदी क्षेत्र (ii) गंगा-नदी क्षेत्र (iii) ब्रह्मपुत्र नदी क्षेत्र ।

प्रश्न 9. वर्षा का कितना प्रतिशत जल वाष्पित होकर वायुमंडल में चला जाता है?

उत्तर — वर्षा का जल लगभग 20% भाग वाष्पित होकर पुनः वायुमंडल में चला जाता है।

प्रश्न 10. पृथ्वी को नीला ग्रह की संज्ञा क्यों दी जाती है ?

उत्तर-पृथ्वी पर जल की उपस्थिति के कारण ही पृथ्वी को नीला ग्रह की संज्ञा दी जाती है।

प्रश्न 11. टिहरी परियोजना का विरोध का मुख्य कारण क्या है ?

उत्तर-टिहरी परियोजना का विरोध का मुख्य कारण भूकंप प्रवण क्षेत्र है एवं लोगों का विस्थापन से जुड़ा है

प्रश्न 12. भारत में कुल विद्युत का कितना प्रतिशत जल-विद्युत से प्राप्त होता है?

उत्तर-वर्तमान समय में भारत में कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 22 प्रतिशत भाग जल-विद्युत से प्राप्त होता है।

प्रश्न 13. भूमिगत जल किसे कहते हैं ?

उत्तर-वर्षा जल के धरातलीय छिद्रों से रिस-रिसकर कठोर शैलीय आवरण पर जमा जल भूमिगत जल कहलाता है।

प्रश्न 14. राष्ट्रीय जल नीति को कब स्वीकृत किया गया?

उत्तर- जल संसाधन के दुर्लभता या संकट निवारण हेतु सरकार ने सितम्बर, 1987 में ‘राष्ट्रीय जल नीति’ को स्वीकृत किया ।

प्रश्न 15. नर्मदा बचाओ आंदोलन क्या है?

उत्तर-नर्मदा बचाओ आंदोलन एक गैर सरकारी संगठन है जो स्थानीय लोगों, किसानों, पर्यावरणविदों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गुजरात के नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध के विरोध के लिए प्रेरित करता है

 

प्रश्न 16. “जल एक दुर्लभ संसाधन है।” कैसे?

उत्तर-विश्व में उपलब्ध कुल जल का 96.5% भाग महासागरों में खारा पानी के रूप में है जो पीने योग्य नहीं है। शेष 2.5% जल मीठे पानी के रूप में है। इसका भी मात्र 30% भाग ही नदियों, तालाबों एवं भूमिगत जल के रूप में है। यही नहीं, इस जल का वितरण भी काफी असमान है एवं प्रदूषित भी होता जा रहा है। इसलिए, जल एक दुर्लभ संसाधन है।

प्रश्न 17. कोसी परियोजना का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें।

उत्तर-बिहार की कोसी नदी पर विकसित कोसी परियोजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़-नियंत्रण, सिंचाई, भूमि-संरक्षण, मलेरिया-नियंत्रण एवं जलविद्युत उत्पादन करना है। इस परियोजना की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 20 हजार मेगावाट है, जिसकी आधी बिजली नेपाल को दी जाती हैं इस परियोजना के तहत नेपाल स्थित हनुमाननगर में बराज का निर्माण किया गया है।

प्रश्न 18. भारत के असमाप्त होनेवाले भौम जल संसाधन का वर्णन कीजिए?

उत्तर- भारत के असमाप्त होने वाले जल संसाधन ऐसे संसाधन हैं जिन्हें हम कुँओं और नल-कूपों की सहायता से प्रयोग में ला सकते हैं, विशेषकर उन
परिस्थितियों में जब भूमि को धरातल पर पाए जाने वाले जल की कमी हो जाए। भारत में भौम जल की सम्भावित क्षमता लगभग 434 अरब घन मीटर है। इस भौम जल का अधिकतर भाग भारत के मैदानी भागों में पाया जाता है। उत्तरी भारत में, क्योंकि वर्षा अधिक होती है इसलिए वर्षा का एक बड़ा भाग रिस-रिसकर भूमि के नीचे चला जाता है, इसलिए वहाँ भौम जल की मात्रा बढ़ जाती ह अभी तक हम इस भौम जल के 37 प्रतिशत भाग का ही उपयोग करने में समर्थ हुए हैं

प्रश्न 19. जल-प्रदूषण रोकने के उपायों की चर्चा करें।

उत्तर-जल-प्रदूषण रोकने के प्रमुख उपाय हैं

(i) शहरों या नगरों का कूड़ा-करकट, मल आदि निकटवर्ती नदियों अथवा जलाशयों में उपचारित कर गिराना।

(ii) कल-कारखानों से निकलनेवाले अपशिष्ट रासायनिक पदार्थों को जलाशयों या नदियों में नहीं गिरने देना।

(iii) तालाबों एवं खेतों में कम-से-कम कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना।

(iv) महासागरों में परमाणु बम परीक्षण आदि के प्रयोग पर रोक लगाना।

(v) जल प्रदूषित न करने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना।

प्रश्न 20. जल संभर विकास क्या है?

उत्तर – जल संभर वह क्षेत्र है जिसे बड़ी नदी की एक सहायक नदी सींचती है। इसके विपरीत एक ऐसा विशाल क्षेत्र जिसे एक नदी और उसकी सहायक नदियाँ सींचती हैं उसे द्रोणी कहा जाता है। इस प्रकार जल संभर नदी द्रोणी का एक भाग-मात्र होता है। जब एक जल संभर का विकास करने के लिए अनेक प्रयत्न किये जाते हैं तो इसे जल संभर विकास कहते हैं। जल संभर विकास में क्षेत्र को विकसित करने के अनेक प्रयत्न किए जाते हैं जैसे जल संग्रहण, मिट्टी और आर्द्रता का संरक्षण,
वृक्षारोपण, उद्यान-कृषि, चारागाह विकास तथा सामुदायिक भूमि संसाधनों का विकास आदि सम्मिलित होता है। ऐसे कार्य में स्थानीय लोगों के सहयोग एवं सहायता की आवश्यकता पड़ती है। राज्य एवं केन्द्रीय सरकारें जल संभर विकास
को सफल बनाने में हर सम्भव प्रयत्न करती हैं ताकि भूमि की क्षमता भी बनी रहे और स्थानीय लोगों की आवश्यकताएँ भी पूरी होती रहें।

प्रश्न 21. भारत में जल संसाधन का वितरण अपर्याप्त है। कैसे?

उत्तर — भारत में जल संसाधन का वितरण अपर्याप्त है क्योंकि भारत में विश्व की लगभग 16% आबादी निवास करती है और इस आबादी के लिए विश्व का लगभग 4% जल ही उपलब्ध है। भारत में प्रतिवर्ष 4000 घन कि०मी० जल वर्षण
से तथा 1869 घन कि०मी० जल भूपृष्ठीय जल से प्राप्त होते हैं । कुल भू-पृष्ठीय जल का लगभग 2/3 भाग देश की तीन बड़ी नदियाँ; सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र में प्रवाहित है आज भारत में जल भंडारण हेतु जलाशयों का निर्माण द्रुत गति से हो रहा
जिसकी जल भंडारण की क्षमता लगभग 174 अरब घनमीटर हो गई है। भारत की स्थलाकृति स्वरूप एवं अन्य बाधाओं की वजह से केवल 690 अरब घनमीटर जल का ही उपयोग का पता है।

प्रश्न 22. भूमिगत जल के उपयोग में क्या समस्याएँ आती हैं ?

उत्तर-जल मनुष्य के जीवन का मुख्य आधार है। यह न केवल कृषि के लिए आवश्यक है, वरन् इससे मानव की अनगिनत अन्य समस्याएँ भी हल होती हैं। शताब्दियों से मानव भू-पृष्ठीय जल एवं भूमिगत जल का प्रयोग अपने लाभ के लिए करता आ रहा है। विशेषकर जब मनुष्य को निकट से भू-पृष्ठीय जल की उपलब्धि न हो सके तो उसे भूमिगत जल के उपयोग में अनेक समस्याओं का सामना करना
पड़ता है।

इसमें कुछ मुख्य समस्याएँ इस प्रकार हैं-

(i) जल-स्तर का नीचे चला जाना—जब भू-पृष्ठ जल निकट उपलब्ध न हो तब मनुष्य भूमिगत जल का प्रयोग करने लगता है। ऐसा निरन्तर करते रहने से जल-स्तर काफी नीचे गिर जाता है और कई बार तो कुएँ बिल्कुल ही सूख जाते हैं।

(ii) पहाड़ी भू-भाग का बड़ी रूकावट सिद्ध होना भूमिगत जल का प्रयोग करने के लिए भूमि में कुएँ खोदने पड़ते हैं और यदि भूमि पहाड़ी हो तो इन कुओं का खोदना एक बड़ी विकट समस्या बन जाती है। ऐसे में भूमिगत जल तक पहुँचना
ही कठिन बन जाता है तो उसका उपयोग कैसे किया जा सकता है।

(3) महँगा सौदा यदि पानी बहुत हो तो गहरे कुएँ खोदने में बहुत खर्च आ जाता है । न केवल खुदाई में अधिक लागत आती है, वरन् पम्प सेट तथा पाइपों आदि के खरीदने में भी काफी धन की आवश्यकता पड़ती है

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